Sonam Wangchuk End's Hunger Strike: देशभर में नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि सरकार पेपर लीक जैसे अपराधों के खिलाफ और सख्त कानून लाने जा रही है, वहीं राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग दोहराते हुए सरकार पर छात्रों की आवाज अनसुनी करने का आरोप लगाया है। राहुल का सरकार पर हमला यह पूरा घटनाक्रम उस समय और तेज हो गया, जब प्रधानमंत्री के छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी करने के कुछ घंटे बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। राहुल ने कहा कि देश के छात्र लगातार जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों की भावनाओं का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है और उनकी मांगों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। https://twitter.com/RahulGandhi/status/2080375315063566480 धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल पद छोड़ देना चाहिए। उनका कहना है कि जब देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लग रहे हों, तब जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। उन्होंने यह भी मांग की कि छात्र आंदोलन के दौरान जिन प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया, उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही आंदोलन में शामिल छात्रों से सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर उन्हें राहत दी जाए। राहुल गांधी का कहना है कि केवल बयान देने से छात्रों का भरोसा वापस नहीं आएगा। इसके लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रही है। PM मोदी का भरोसा दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि सरकार इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से देख रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल एक परीक्षा की समस्या नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों और उनके भविष्य से जुड़ा संवेदनशील विषय है। ऐसे अपराधों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले करीब ढाई महीनों के दौरान जांच एजेंसियों ने कई राज्यों में कार्रवाई करते हुए अनेक आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी अपराधी को कानून से बचने का मौका न मिले। नए कानून की तैयारी उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नए कानूनी प्रावधान तैयार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों की सुनवाई 'फास्ट ट्रैक कोर्ट' में कराई जाएगी, ताकि फैसले जल्द हो सकें। साथ ही दोषियों के लिए पहले से अधिक कठोर सजा का प्रावधान किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संबंध में तैयार विधेयक के मसौदे पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में चर्चा होगी और मंजूरी मिलने के बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा। 26 दिन बाद वांगचुक ने तोड़ा अनशन इस पूरे विवाद के बीच छात्र आंदोलन से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण खबर सामने आई। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों की मांगों के समर्थन में 26 दिनों से अनशन पर बैठे थे, उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया। गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। वांगचुक ने उम्मीद जताई कि सरकार छात्रों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करेगी और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएगी। भरोसा बहाल करने की चुनौती नीट पेपर लीक विवाद अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। यह मुद्दा शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, सरकारी जवाबदेही और छात्रों के भविष्य से जुड़ी राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है। विपक्ष सरकार पर जिम्मेदारी तय करने का दबाव बना रहा है, जबकि केंद्र सरकार सख्त कानून और तेज कानूनी कार्रवाई का भरोसा दे रही है। अब देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि प्रस्तावित कानून संसद से पारित होता है और उसकी प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन होता है, तो भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। ये भी पढ़ें: CJP ने 24 जुलाई को बुलाया देशव्यापी प्रदर्शन, छात्र आंदोलन को धार देने की तैयारी